कविता · Reading time: 1 minute

परिधि…

इन्द्रधनुष में लिपटे होते हैं कई रंग
तैरते उसकी देह पर
स्थापित होते हैं
एक छोर से दूसरी छोर तक
रंगों में प्रवेश करती है
बारिश की बूँदें…टप टप
और एक तीक्ष्ण किरण
शायद बनाती एक नदी या ठहरा पानी
जिसके ऊपर चमकती है
वह भेदती तेज धूप
बनाती कुछ तस्वीरें
शून्य लुढ़कता है
अतंस ऊर्जा लिए
शून्य की परिधि…….

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