परिणय बंधन

विवाह अक्षत पवित्र बंधन है ,मन आत्मा ह्रदय का मिलन है l
एक पथ दो राही का संगम,विवाह जन्मों का बंधन है l
परिणय बंधन मंगल पद हो, जीवन का पल-पल सुखमय हो l
तुमको रब खुशियां वैभव दे, मौसम जीवन का मधुमय हो l

बबीता तू जहाँ रखे कदम,वह घर नव जन्नत हो जाए l
दुष्यंत और बड़ो का दुआ,हर ख्वाब हकीकत हो जाए l
सौरभ सी सहज ह्रदय मन हो, प्रमुदित दिल का घर आँगन हो l
ओम विला का संस्कार रहें, मंदिर सा पावन बंधन हो l

हर स्वप्न सलोना हो पूरा, अधर पर हो सोंधी मुस्कान l
हाँ रब से मन्नत माँगा है, हर्षित पुलकित हो बाँगबान l
आँगन हो बसंत कुंज सा,नव खुशियों का संसार मिलेl
राह में जीत औ’ प्रीत मिले,तुमको मीठी मनुहार मिले l

हो मधु सा डगर सुमधुर सफ़र,हो रम्य सुखद जीवन अनुपम l
दिल आशियां मुस्काता रहें,तुझमें आ ठहरे कुसुमागम l
खुशियों से भरी रहें आँचल,न हो कभी तेरी अंखियां तर l
नब्य पल मधुर खुशियां लाए, कुसमित ज्योतित हो जाए घर l

तुम हो चन्द्रानी मधुबाला, तेरा साजन शशिबाला सा l
तुम गोकुल की मालिन सी हो, बालम है मुरली वाला सा l
वो साया बन पास रहेगा, वो तेरा दिलवर हमराही l
रीत प्रीत भी साथ निभाना, कदम कदम पे तुम औ’ माही l

*दुष्यंत कुमार पटेल*

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