परिचय

परिचय ख़ुद से कर मना,मिले ख़ुदी का भान ।
उससे नित हो सामना ,रमे उसी
में ध्यान ।
रमे उसी में ध्यान,होय अजपा-
जप अरचय।
मिले परम-पद स्थान, किया जब
ख़ुद से परिचय।।

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