Jul 8, 2016 · कविता
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परशुराम के वंसज है हम मिलकर कदम बढ़ायेगे !

परशुराम के वंसज है हम मिलकर कदम बढ़ायेगे !
हम ब्राह्मण भाई के खातिर सूली पर चढ़ जायेगे !!

आरक्षण का लोभ नही है हम किशान के बच्चे है !
मेहनत कर तक़दीर बदलते कर्म हमारे अच्छे है !!

आने वाली पीढ़ी को हम अच्छी राह् दिखायेगे !
परशुराम के वंसज है हम मिलकर कदम बढ़ायेगे !!

हर गरीब ब्राह्मण का बच्चा जब विद्यालय जायेगा !
पढ़ें लिखेगा ध्यान लगाकर अधिकारी बन जायेगा !!

गूँगे, बहरे, लगड़े, अंधे को , है संकल्प पढ़ायेगे !
परशुराम के वंसज है हम मिलकर कदम बढ़ायेगे !!

धन दहेज अरु उच्च निम्न का मन में भेद नहीं होगा !
लड़का लड़की हो एक समान किंचित भेद नहीं होगा !!

छोट बड़ों का मर्यादा से संबंधों के सारा फर्ज निभायेगे !
परशुराम के वंसज है हम मिलकर कदम बढ़ायेगे !!

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Ashish Tiwari
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