23.7k Members 50k Posts
Coming Soon: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता

परदेसी

जब भी देखता हूं
फोटो देश की अपनी
इंटरनेट पर
भर जाता है
दिल उमंग से
जगता है
उमड़ता है
देश प्रेम
अपने आप से ।
बिछड़े एक अरसा हो गया
जिन दोस्तों से
देखता हूँ
उनकी तस्वीर जब भी
Facebook पर
हजार बातें,अनगिनत यादें
एक संग याद आती है
दिल के दरवाजे पर ।
जब भी होती है बातें
WhatsApp पर,
वीडियो कॉल पर
परिवार से,
रिश्तेदार से
चाहता हूँ
कह दूँ सारी दिल की बातें
जो उतरना चाह रही है
अल्फाजों में
कि !
मां तेरे हाथों का खाना याद आ रहा है !
पापा आपका डांटना याद आ रहा है !
भाभी आपका पुचकारना याद आ रहा है !
भैया तेरा साथ याद आ रहा है !
पर नहीं कह पाता
हूँ थोड़ा संकोची
स्वभाव से ।
कई बार नहीं हो पाती है
व्यक्त भावनाएं
फोन पर सही ढंग से
होती है व्यक्त भावनाएं
सही ढंग से
जब मिलते हैं हम
आमने-सामने से ।
हूँ मैं अपने घर से दूर
परदेसी में
पर
मेरा दिल और जान
बसता है
स्वदेश में !
??????????????????????????????

22 Views
Er Dev Anand
Er Dev Anand
10 Posts · 431 Views
दिमाग से इंजीनियर दिल से रचनाकार ! वस्तुतः मैं कोई रचनाकार नहीं हूँ, मैं एक...
You may also like: