परदेश

एक दिन परदेश छोड़कर तुझे दूर अपने “देश ” है जाना ,
सखी, तू क्यों होती है उदास , तुझे “पिया” घर है जाना I
रिश्ते- नाते छोड़कर तुझे “पिया” की नगरी में है घर बसाना,
उस नगरी में तुझे “परदेश” का सारा अच्छा- बुरा है बताना I
“राज” अगर पहले जान जाता तो परदेश को पक्का ठिकाना न बनाता,
अगर छोड़कर दूसरे “देश” जाना ही है, तो इतना मोह कभी न बढाता I

देशराज “राज”
कानपुर

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 302

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share