परदेश

एक दिन परदेश छोड़कर तुझे दूर अपने “देश ” है जाना ,
सखी, तू क्यों होती है उदास , तुझे “पिया” घर है जाना I
रिश्ते- नाते छोड़कर तुझे “पिया” की नगरी में है घर बसाना,
उस नगरी में तुझे “परदेश” का सारा अच्छा- बुरा है बताना I
“राज” अगर पहले जान जाता तो परदेश को पक्का ठिकाना न बनाता,
अगर छोड़कर दूसरे “देश” जाना ही है, तो इतना मोह कभी न बढाता I

देशराज “राज”
कानपुर

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