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पनघट

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

दोहे

August 31, 2016

पनघट अब मिलते कहाँ , सूख गए सब कूप
देखो अब तो गाँव का ,बदल गया है रूप

हँसता था पनघट जहाँ , आज वहाँ सुनसान
होता था ये गाँव की , कभी बड़ी सी शान

अब भी हैं देखो यहाँ , कितने ऐसे गाँव
पनघट पर जाना पड़े , कोसों नंगे पाँव

पनघट पर मिलते रहे , कितने प्यासे नैन
पली यहाँ पर प्रीत भी, मिला दिलों को चैन

पनघट पूरे गाँव को, करता था परिवार
सुख दुख सारे बाँट कर, बढ़ जाता था प्यार

डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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