कविता · Reading time: 1 minute

…. पद …2

भगवन ! कैसे दर्शन पाऊँ ?
तीरथ चारो धाम गया जा , सागर गंग नहाऊँ ।
अर्पण तर्पण पूर्ण समर्पण , कंठी कर सरकाऊँ ।
उपक्रम पूजन षटकर्मो सँग , कोटिक सुमन चढ़ाऊँ ।
मन्दिर मस्जिद गिरजाघर में , नित निज शीष नवाऊँ ।
किस विधि ध्याऊँ भाव सुझाओ, भव-सागर तर जाऊँ ।

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