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पथिक वही जो बढ़ता जाता

Rita Singh

Rita Singh

कविता

March 14, 2017

पथिक वही जो बढ़ता जाता
अवरोधों से कब घबराता ,
ऊँची-नीची सब राहों पर
बिना रुके वो चलता जाता ।
पाषाणों से जब टकराता
असंभव को संभव बनाता ,
बड़े बड़े तूफाँ से लड़कर
विजय रथ पर चढ़ता जाता ।

डॉ रीता

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Author
Rita Singh
नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन... Read more
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