पथिक तुम इतने विव्हल क्यों ?

पथिक तुम इतने विव्हल क्यों ?

पथिक तुम

इतने विव्हल क्यों ?

क्या सूझ नहीं रहा

मार्ग तुमको ?

जीवन की जटिलतायें ,

यात्रा की यातनायें ,

अँधेरे का भय ,

अधूरे सपनों का जाल ,

क्या ये सब तुझे

भयभीत करते हैं ?

मैं पथिक हूँ

मुझे मार्गों का भय कैसा ?

मुझे अँधेरे का डर कैसा ?

उपर्युक्त सभी विषय

मुझे व्याकुल नहीं करते

मेरी निगाह मंजिल पर है

केवल मंजिल पर

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मैं अनिल कुमार गुप्ता , शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ मुझे कवितायें लिखने ,...
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