Sep 3, 2018 · कविता
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पत्थर तब बनता भगवान

देखो हिम्मत चट्टानो की तेज वेग है तूफानो की
लडता है सीना को तान पत्थर तब बनता भगवान
छेनी की तेज धार को एक नही हजार वार को
सहती है चट्टान पत्थर तब बनता भगवान
कुछ बाधाओ के आने से थोडी ठोकर ही खाने से।
क्यो डरता इंसान. पत्थर से ले ज्ञान।
लक्ष्य का कर संधान. क्यो डरता है इंसान।

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Vindhya Prakash Mishra
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विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ । मै... View full profile
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