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* पति एकता जिंदाबाद *

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

February 26, 2017

रविवार का दिन था
पीड़ित-प्रताड़ित-पति
जुलूस के साथ नारे लगा
रहे थे …………..
पति एकता जिंदाबाद
पति एकता जिंदाबाद
इतने में पत्नियों का हुजूम
आया …….मै जोर जोर से
नारे लगा रहा था
पति एकता जिंदाबाद
जिन्दा……………..
पीछे देखा तो सभी
पति नदारद …..मै अकेला
पत्नी को देखा तो
सती-पति की याद आयी
बोलने लगा ……….
सती एकता जिंदाबाद-2
पत्नी शेर की तरह गुर्राई
और घर को चली गयी ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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