.
Skip to content

पता लगाओ सुबह कहां हो रही है।

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

July 17, 2017

पता लगाओ सुबह कहां हो रही है
आज भी दुनिया पूरी सो रही है
घना अंधेरा ही दिख रहा है चारो तरफ
तुम कहते हो रात कट रही है
घनी सी चादर के आगोश मे है हम सब
कौन कहता है देखो पौ फट रही है
नींद के संपने ही अच्छे थे सुखद लगे
हकीकत मे देखा तो परेशानी लग रही है
भ्रम मे थे सुबह सुखद होगी
दिन भी आज अंघेरे मे रात लग रही है
मानता हू सबेरा होगा सबके जीबन मे
मेहनत के सहारे ही घनी रात कट रही है
विन्ध्यप्रकाश मिश्र

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
Recommended Posts
कहानी -- वीरबहुटी
वीरबहु‍टी --- कहानी-- निर्मला कपिला साथ सट कर बैठी,धीरे धीरे मेरे हाथों को सहला रही थी । कभी हाथों की मेहँदी कोदेखती कभी चूडियों पर... Read more
कहानी -----कसौटी ज़िन्दगी की
कसौटी रिश्ते की --कहानी उनकी आँखों से आँसूओं का सैलाब थमने का नाम ही नही ले रहा था।मै उनको रोकना भी नही चाहती थी------- आज... Read more
कहानी -----कसौटी ज़िन्दगी की
कसौटी रिश्ते की --कहानी उनकी आँखों से आँसूओं का सैलाब थमने का नाम ही नही ले रहा था।मै उनको रोकना भी नही चाहती थी------- आज... Read more
माँ कैसी  हो तुम ?
कहानी माँ कैसी हो तुम ? आभा सक्सेना देहरादून कल ही मैं माँ को मेंन्टल हाॅस्पीटल में छोड़ कर आयी हूं उनको मेंटल हाॅस्पीटल में... Read more