पता ना चला

दुश्मनों की जंग लड़ते लड़ते अपने भी कब दुश्मन बन गए पता न चला
सरहदों की सीमा तय करते करते कब घरों में बंटवारा हुआ पता न चला लहू बहते-बहते हमारे तुम्हारे कब मन भी मिला हुआ पता ना चला
अपनी मां बहन की सुरक्षा की शपथ ली सभी ने कब और उनके लिए नजर बदल गई पता न चला गरीबों को देखकर दुत्कारते हुए कब आत्मा गरीब हो गई पता ना चला

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