कविता · Reading time: 1 minute

पतंग सा जीवन… !!

जीवन है एक पतंग, हिम्मत होती है हवा समान,
हिम्मत न हो कुछ करने की, तो क्या आयेगी.. जान-मे-जान !

डोर जरा ढीली कर दो नम्रता से करो श्रृंगार,
जितने नम्र रहोगे जीवन मे, उतनी ऊची बनेगी पहचान !

चाहे जितने झोंके आये, पतंग का रुख ना मूढ़ पाए !
तुम खींचो ताव जरा जम के, कोई तोड़ ना तेरा बन पाए !!

कर मंथन जरा इस पर, कैसे बुलंदी आसमान की छू ली जाये !
खेल ऐसे दाँव की मंजिल खुद कदमो को चूमने आये !!

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