पतंग और माँझा

लाल हरी नारंगी नीली
कुछ तो पूरी ही रंगीली
पापा खूब पतंगें लाये
चरखी माँझा भी ले आये

भागे सरपट हम भी छत पर
पापा जी का हाथ पकड़कर
चरखी तो हमको पकड़ाई
पापा ने फिर पतंग उड़ाई

इधर उधर वो नाच रही थी
खूब पतंगें काट रही थी
ऊपर एक पतंग लहराई
कट कर हाथ हमारे आई

माँझे को था हमने पकड़ा
पर उसने उँगली को जकड़ा
चाइनीज माँझा था सारा
उसने ऐसा खेल बिगाड़ा

काट हमारी उँगली डाली
बही खून की ऐसी नाली
जोर जोर से हम चिल्लाये
पापा हमें देख घबराये

हमें उठाकर फौरन भागे
मम्मी भी थी आगे आगे
आँसू थे उनकी आँखों में
और बड़ी तेजी साँसों में

डॉक्टर को जाकर दिखलाया
आपरेशन उनसे करवाया
उँगली वो फिर से चिपकाई
पापा मम्मी ने खैर मनाई

करते सबसे एक प्रार्थना
हो न फिर ऐसी दुर्घटना
चाइनीज माँझा मत लाओ
जब भी देखो पतंग उड़ाओ

14-01-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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