पढ़ना तो सीखो, लिखना खुद-ब-खुद सीख जाओगे

पढ़ना तो सीखो, लिखना खुद-ब-खुद सीख जाओगे।
गिरना तो सीखो, उठाना खुद-ब-खुद सीख जाओगे।

बोलना भी आजकल बच्चे सीखने जाने लगे हैं।
सुनना तो सीखो, बोलना खुद-ब-खुद सीख जाओगे।

जीने को भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है यहां।
मरना तो सीखो, जीना खुद-ब-खुद सीख जाओगे।

बड़ी जल्दी पड़ी है जीतने को लोगो को जमाने मे।
हारना तो सीखो, जीतना खुद-ब-खुद सीख जाओगे।

अंजनी ‘कुमार’ मिश्रा
मंडीदीप(भोपाल)

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