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**** पट पीछे छिपी है ****

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

November 10, 2017

10.11.17 *** सन्ध्या *** 5.01

पट झीना पट भीतर है झीनी मुस्कान

दन्तावली से झांक रही झीनी मुस्कान

मुस्काती मेहंदी-संग आस पियामिलन

झुका है आकाश देख-देख ये मुस्कान ।।
?मधुप बैरागी

10.11.17 *** सन्ध्या *** 5.15

पट पीछे छिपी है मधुर-मधुर मुस्कान मनोहर

मन-हास चेहरा-उजास मधुर मुस्कान मनोहर

रंग-मेहंदी-संग मन-रंग-संग-पिया- मन-भावन

आज नवेली-नार देखो मधुर मुस्कान मनोहर ।।
?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
From: मुक्ता प्रसाद नगर , बीकानेर ( राजस्थान )
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
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