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पकड़ो आत्म-सुबोध,दिव्य गुरु का साया तुम

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कुण्डलिया

April 3, 2017

तुम ,नव संवत पर बनो, मानवता-महबूब|
ग्रहण करो सद्ज्ञान तब, परमानंदी-खूब||
परमानंदी-खूब, मिलेअनुपम विकास-कन|
अमल प्रेममयरूप,और सद्गुण-प्रकाश मन||
कह “नायक” कविराय, छोड़ दो जग-माया-दुम|
पकड़ो आत्म-सुबोध,दिव्य गुरु का साया तुम||

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता

महबूब=प्रेमी
परम=अत्यंत
आनंदी=प्रसन्न रहने बाला
खूूूूब=उत्तम

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more