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न निकली आह है

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

April 8, 2017

पुरस्कारों की, न मुझको चाह है |
खिलखिलाहट से हमारा ब्याह है |
माँग ना यश की, रहाआनंद में
जगत् -शूलों बिच, न निकली आह है |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि
आलोक” कृतियों के प्रणेता

08-04-2017

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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