.
Skip to content

न जीना मुहाल कर मुझे तु जहर दे

बबीता अग्रवाल #कँवल

बबीता अग्रवाल #कँवल

गज़ल/गीतिका

March 4, 2017

न जीना मुहाल कर मुझे तु जहर दे
कफ़स में रखे तो मेरे पर कतर दे

ठिकाना नहीं है मुझे कोई घर दे
नहीं घर अगर कोई तेरा ही दर दे

सहारा यतीमों का मुझको बना दो
दुआओं मे मेरी तो इतनी असर दे

सलामत रहे ये दिवाना हमारा
क़यामत का इनको न कोई कहर दे

के नफ़रत निभाना कँवल अब नहीं है
रक़िबों के सीने में भी प्यार भर दे

Author
बबीता अग्रवाल #कँवल
जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)
Recommended Posts
तूफान साहिलों पे ठहरने न दे  मुझे
आज की हासिल ग़ज़ल ******** 221 2121 1221 212 अपनी निगाहों से तू उतरने न दे मुझे मैं बावफ़ा हूँ यार बिख़रने न दे मुझे... Read more
** अभी बाकी है **
अभी बाकी है कुछ लम्हे मुझे ओर जीने दे क्या फ़र्क पड़ता है मुझे कुछ ओर पीने दे दरख्त भी सूखते हैं वक्त आने पर... Read more
उरियां क़बा न दे
मैला लिबास दे मुझे उरियाँ क़बा न दे दौलत दे बे शुमार ज़रा सा नशा न दे डालूं जिधर नज़र तेरी रहमत है बे शुमार... Read more
*  चार शेर *
जीना चाहा था मगर जिंदगी ना मिली । मौत भी अब हमसे अपना दामन छुड़ा के चली ।। लोग कहते हैं अब भी मै जिन्दा... Read more