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न को नकार

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

August 11, 2017

न को नकार सच स्वीकार
पाने को जीत मिलती है हार
सोच रही सकार पहुंचा जो पार
हीरा की खोज मे मिलता है छार
पाने को बीस मिलता है चार
मै गिरा उठा पहुचा जो द्वार
आश्चर्य युक्त है संसार
विन्ध्यप्रकाश मिश्र

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Author
Vindhya Prakash Mishra
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ । चिंतनशील जीव होने के कारण कुछ न कुछ सृजित करता हूँ । पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में मनन... Read more
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