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नोटबंदी

सियासत क्यों इतना भी घबरा रही है।
नोटबंदी तो हर जन को भा रही है।

बडी मछलियां बस सिर उठाती दिखी।
क्या समुद्र में आग लगने जा रही है।।

अच्छे फैसले का स्वागत होना चाहिए।
अपने हित हेतु ऊँगली उठे जा रही है।।

प्रीत देशप्रति हृदय में बसाकर रखिए।
एकजुट जनता इसपर हुए जा रही है।।

खिलेंगे इंसानियत के फूल तुम देखना।
कोई नई ताक़त नज़र कहीं आ रही है।।

मोदी जी ने जो भी है किया सिर-माथे।
देखो कालेधन की आग बुझे जा रही है।।

विकास का गीत गुनगुनाएं और साथ दें।
घड़ी देशभक्ति,इम्तिहान की आ रही है।।

साथ सदा सच्चाई का दीजिए सुख मिले।
काठ की हांडी न हरबार चढ़े जा रही है।।

जमीनी हकीकत जाने वही सच्चा हितैषी।
मोदी में वही मिट्टी की महक आ रही है।।

ऐसे कर्म करो दुनिया मिशाल दे जिसकी।
यूँ तो इंसानी रूह जग में आ-जा रही है।।

“प्रीतम”प्रेम का बादल बन बरस कोने-कोने।
हरकहीं सच्चे प्रेम की कमी खले जा रही है।।

–आर.एस.प्रीतम

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आर.एस. प्रीतम
आर.एस. प्रीतम
जमालपुर(भिवानी)
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प्रवक्ता हिंदी शिक्षा-एम.ए.हिंदी(कुरुक्षेत्रा विश्वविद्यालय),बी.लिब.(इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) यूजीसी नेट,हरियाणा STET पुस्तकें- काव्य-संग्रह--"आइना","अहसास और ज़िंदगी"एकल...