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नोट बने कागज के पत्ते

Rita Singh

Rita Singh

कविता

November 9, 2016

हर गली और हर नुक्कड़ पर
आज यही एक शोर है ,
नोट बने कागज के पत्ते
फुटकर बन गए सिरमौर हैं ।

बच्चों की गुल्लक खर्च उठाए
तिजोरी बनी आज चोर है।
पूजी जाती थी जो लक्ष्मी सम
अब चलता न उसका जोर है ।

नोटों की चतुरंगिणी सेना में
कल तक थे जो राजा रानी ,
विधि की मार पड़ी ऐसी देखो
पीये न उनसे आज कोई पानी ।

डॉ रीता
आया नगर,नई दिल्ली ।

Author
Rita Singh
नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन... Read more
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