.
Skip to content

नोट-बंदी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

गज़ल/गीतिका

December 25, 2016

हर तरह से हर गति अब आज मंदी हो गई ।
जब से मेरे देश में ये , नोट-बंदी हो गई ।

मिट्टी के भाव से बिकता है किसानों का अनाज ,
निर्धनों के घर में ज्यादा और तंगी हो गई ।

बैंक की लाइन में अब भी भीड़ केवल निर्धनों की,
घर बैठे ही बड़ों-बड़ों की नयी करेंसी हो गई ।

वेईमानी करने का मौका हमें पहले नहीं था ,
नोट-बंदी की कृपा से अपनी चाँदी हो गई ।

श्वेत ने काले को बिल्कुल दूधिया-सा कर दिया,
बैंक बालों की चुनरिया आज धानी हो गई ।

बैंक का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है अब भी,
पतिव्रता कहते थे जिसको, आज रंडी हो गई ।

दम नहीं ‘ईश्वर’ यहाँ पर शेर की भी गर्जना में ,
अब व्यवस्था गीदड़ों की चाल- मंडी हो गई ।

ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवम् शिक्षक ।

Author
ईश्वर दयाल गोस्वामी
-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार... Read more
Recommended Posts
ग़ज़ल ''....''पंजाबी हो गई हैं ''
शर्म क़सम से गुलाबी हो गई हैं नियत भी अब पंजाबी हो गई हैं लहर बहती जहाँ मुहब्बत वाली 'ब' तेज़ाबी हिज़ाबी हो गई हैं... Read more
प्यार की दुनिया बसानी रह गई
बात जो दिल की बतानी रह गई प्यार की दुनिया बसानी रह गई चाँद तारों साथ महकी रात भर अब अकेली रात रानी रह गई... Read more
नोट बंदी
        नोट बंदी मोदी जी के नोट बंदी ने, हाहाकार मचा दिया। काला धन रखने वालों पर, करारा प्रहार कर दिया। अचानक हुए इस फैसले... Read more
नोट बंदी
        नोट बंदी मोदी जी के नोट बंदी ने, हाहाकार मचा दिया। काला धन रखने वालों पर, करारा प्रहार कर दिया। अचानक हुए इस फैसले... Read more