नोट के तेवर—मुक्तक—डी. के. निवातिया

नोट के तेवर क्या बदले, बहुत कुछ बदल गया !
छोड़ काम धाम इंसान लंबी कतार में ढल गया !!
कल तक तिजोरी में बंद सर चढ़कर बोलता था
वो धन आज गन्दी नालियो में बहता मिल गया !!

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डी. के. निवातिया

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