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नोटबंदी-एक सिलसिला

अमरेश गौतम

अमरेश गौतम

कविता

December 14, 2016

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब,
गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब है।
कालाधन तो अब,आप जैसों से निकले हैं,
जो कि हर हाल में, देशहित में खराब है।

“नोटबंदी – एक सिलसिला”

Author
अमरेश गौतम
कवि/पात्रोपाधि अभियन्ता
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