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नैन कटारी

**नैन कटारी (गोपी छंद)*
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आगोश में झट से आओ।
मन अन्दर समा तो जाओ।।
बदन में प्रेम तपिश भारी।
न चला तीर नैन कटारी।।

हम यहाँ पर तड़प रहे है।
तुम वहाँ पर अकड़ रहे हैं।।
दिल का क्या कसूर बताओ।
तुम कभी पास तो बुलाओ।।

प्रीत बहुत बुरी बीमारी।
फैले बन कर महामारी।।
रंक, राजा या व्यापारी।।
बनता प्रेम में भिखारी।।

मनसीरत ने यहाँ जाना।
शमां जलती बिन परवाना।।
भूल जाते वंश ,कुल ,घराना।
प्यासा पपीहा दीवाना।।
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सुखविंदर सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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