गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

नेह लागल उहे बेवफ़ा हो गइल (भोजपुरी)

दिनांक:- ०९/०५/२०२२ (इतवार)
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नेह लागल उहे बेवफ़ा हो गइल।
काल्ह दिल में रहल अब दफा हो गइल।

लोर अखियां से झर झर झरेला सनम,
दर्द तोह से मिलल ऊ दवा हो गइल।

जिन्दगी के सफ़र बा भले चार दिन,
अन्त आवत कहां ऊ फ़ना हो गइल।

आग धधके जिगर में करीं का बयां,
ख्वाब देखल बा अबही मना हो गइल।

काल्ह तरसत रहे ऊ मुलाकात के,
आज लगहीं रहे दिल जुदा हो गइल।

दूर रहिके ग़ज़ल रोज लिखल करीं,
दर्द झेलल ही अब त रजा हो गइल।

बद्दुआ जाने केकर सचिन के लगल,
ज़ख्म देके खुशी बस हवा हो गइल।

✍️ पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’

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