Apr 10, 2021 · कविता
Reading time: 1 minute

नेता रूप

मैं शराब पीकर, शराबियों को गाली लगा देता हूँ ।
ना कुछ ही सही, अपना फर्ज तो निभा लेता हूँ ।।

रोककर खुद को नशे में लड़खड़ाता, झूमता मैं भी हूँ ।
ना कुछ ही सही,अदाकारी कुछ अच्छी दिखा देता हूँ।।

सलाह ,मशवरे और ज्ञान की बातें, दूसरों के लिए मैं भी बहुत करता हूँ ।
हुस्न और मयखाना देखकर, चुपके से कदम उसी तरफ बड़ा देता हूँ ।।

ये भाषा, भेषभूषा, सभ्यता और धार्मिक पाखण्ड, बड़े अच्छे होते है ।
इनकी आड़ में अक्सर, मैं भी दूसरों की आँखों में धूल झौंक देता हूँ ।।

गाली-गलोज, नापाक और दुराचार में मैं भी बहुत करता हूँ ।
जनता की आस्था देखकर, मैं नेता का रूप बदल लेता हूँ ।।

नशा ही तो जिंदगी है, जर,जोरू, जमीन ईमान से ज्यादा जरूरी है ।
मौके पर मौका देखकर, इन्हें पाने के लिए मैं भी चौका लगा देता हूँ ।।

1 Comment · 11 Views
सोलंकी प्रशांत
सोलंकी प्रशांत
161 Posts · 2.2k Views
Follow 5 Followers
मैं कुछ नही, सिवाय चलती-रूकती आत्मा के । इस जन्म मेरा, सामाजिक लिवास सोलंकी प्रशांत... View full profile
You may also like: