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नेता भाई

नेता भाई।
ले मिठाई ।।
वोट माँगने गाँव चले।
सर पे गाँधी टोपी लगाकर।
भटक रहे थे दर-दर जाकर।।
गिरते- बजड़ते संभल-संभलकर ।
घर-घर पहुँचते हाथ जोड़कर।।
कहीं लोग थे हामी भरते।
और कुछ एक उनको कोसते ।।
नेता भाई आए थे करके पूरी तैयारी इस बार।
पर वोटर तो हैं वोटर होते इनका न कोई पारावार।।
नेता भाई भी हमारे थे पक्के वाले असलियत में नेता।
सीख रखा था हर एक तिकड़म जिससे कुछ भला होता ।।

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Bharat Bhushan Pathak
Bharat Bhushan Pathak
DUMKA
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कविताएं मेरी प्रेरणा हैं साथ ही मैं इन्टरनेशनल स्कूल अाॅफ दुमका ,शाखा -_सरैयाहाट में अध्यापन...