दोहे · Reading time: 1 minute

नेता जी

छिड़ी चुनावी जंग है, नेता है बेहाल
देख हवा का रुख सभी, बदल रहे हैं चाल

परनिंदा में ही लगे, खोल रहे हैं पोल
नेता जी का लग रहा, अब के डिब्बा गोल

कैसे भी हो चाहिए ,नेताओ को जीत
प्यारा इनको स्वार्थ है, नहीं देश से प्रीत

मैं अच्छा हूँ तू बुरा, हुई चुनावी रीत
सारे नेता गा रहे, अपने अपने गीत

पाना टिकट चुनाव में , सब पैसे का खेल
इसके आगे हो रहे,अच्छे प्रतिनिधि फेल

नेता केवल वो बने, जो है मालामाल
आम आदमी का तभी, दिखता यहाँ अकाल

नेता कर नेतागिरी, बस करते आराम
जनता के हित से नहीं,इनको कोई काम

8-11-2018
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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