कविता · Reading time: 1 minute

नेता जी बस इस चुनाव में मुझे भी टिकट दे दो

नेता जी बस इस चुनाव में मुझे भी टिकट दे दो,
नेता बनने के सारे गुण हैं, चाहे इम्तिहान ले लो।

नेता जी झूठ बोलने में बड़ी महारत हासिल है,
हर कोई कहता है मुझे, नेता बनने के काबिल है।

जोड़ तोड़ करने में भी मेरा कोई मुकाबला नहीं है,
जोड़ तोड़ के बिना राजनीती में होता भला नहीं है।

नेता जी दादागिरी भी कर लेता हूँ मौका देखकर,
चापलूसी पर आ जाता हूँ हवा का झौंका देखकर।

मौनव्रत धारण करके सारे पापों को भी धो लेता हूँ,
फ़ायदा उठाने को मगरमच्छी आँसू भी रो लेता हूँ।

लोगों को चुना लगाने की बताऊं ही क्या आपको,
ठग चूका हूँ मैं दो तीन बार अपने ही सगे बाप को।

दो चार बार दसवीं बारहवीं में फ़ैल भी हो चुका हूँ,
सच कहूँ नेता जी वो प्रमाण पत्र भी मैं खो चुका हूँ।

बस नेता जी टिकट देकर मेरी यह आस पूरी कर दो,
चढ़ावा स्वीकार करके झोली मेरी टिकट से भर दो।

सुलक्षणा भी देखेगी तमाशा जनता के साथ साथ,
जेबें अपनी भरेंगे हम, ये जनता रहेगी खाली हाथ।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। वर्ष 2014 से लेखन/साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हूँ और हिंदी, हरियाणवी में…
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