नेता चुनो नेक..जो जनता की करे देख

नेता चुनो नेक..जो जनता की करे देख
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आँधी आई सोच की,सोच गई पर दूर।
सत्य उड़ा है रूठ के,झूठ खिली जी पूर।।
झूठ खिली जी पूर,राजनीति बनी खोटी।
अपनी-अपनी चाल,सेंकते सब हैं रोटी।
जनता पर सिर मार,गिरगिटों की है बाँधी।
स्वतंत्र बनिए जीत,बारिश हो लूट आँधी।

नेता झाड़ के बेर हैं,झड़काओ तुम आज।
जो हैं मीठे बेर जी,वो ही पहने ताज।।
वो ही पहने ताज,राहुल लगे या मोदी।
सबक मिले रे एक,देश गरिमा क्यों रोंदी।
स्वार्थ बड़ी है भूल,पागल इसी को खेता।
माने साहिब देश,वही ख़ूब सुनो नेता।

अपनी सुधार भूल तुम,सजग बनो दमदार।
पाए सत्ता राज को,जो ना हो गद्दार।।
जो ना हो गद्दार,करता भेद ना खारा।
सबको समझे एक,वो ही नेता हमारा।
बाँटे जनता आज,दो ना उसको कंपनी।
साल पाँच फिर देख,दुर्गति बनेगी अपनी।

झूठा घटिया मीडिया,बनो तुम जागरूक।
देखो ना झुक खेल तुम,बनके दर्शक मूक।।
बनके दर्शक मूक,आइने-सा सब आगे।
वो हैं पागल लोग,जो अब भी नहीं जागे।
सुन प्रीतम की बात,लोक लोकतंत्र खूँटा।
बाहर निकाल खार,जो बनता फैंक झूठा।

आर.एस.बी.प्रीतम
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