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नेता।

रकमिश सुल्तानपुरी

रकमिश सुल्तानपुरी

दोहे

February 22, 2017

नेता।

नेता नेता न रहे,,,,,,,,,,,रहा न वो जज्बात ।
राजनीति मे ढह गयी,, कुर्सी सँग औकात ।।

नेता के भावुक वचन,,,,,,,,,,, लगे छुड़ाने दाग़ ।
भरे हौसला व्यर्थ में ,,,,,बिन पंखों सा काग ।।

जनता के संज्ञान में ,,,,,,,है नेतन की लोच ।।
पेट स्वयँ का भर गया ,,,मुँह खाये या चोंच ।

राम केश मिश्र

Author
रकमिश सुल्तानपुरी
रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं ।... Read more
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