नेकी को करके भूल जा , करके परोपकार

नेकी को करके भूल जा , करके परोपकार

नेकी को करके भूल जा , करके परोपकार

राहें इंसानियत की , करें तेरा अभिनन्दन

खुद पर कर भरोसा और राह हो नेकी

राह मानवता की , करें तेरा वंदन

लोगों के लिए दिल में , जगा तू संवेदना

खुदा ने तुझको भेजा , देकर ये प्रयोजन

निष्काम भाव से , तुम सेवा करो सदा

सम्मान मिले तुझको , हो तेरा अभिनन्दन

चन्दन की खोज में , तुम न भटकना

ख़ुद को खोजना , खुद को परखना

स्वयं के अस्तित्व पर तुम न लजाना

सत्यपथगामी हो तुम स्वयं को तराशना

संवेदनशील हो दूसरों पर अनुग्रह करना

दयावान हो दूसरों की मदद करना

कर्मपथ पर बढ़ना , सत्कर्म करना

सागर सा विशाल ह्रदय ले तुम विचरना

प्रकृति से अपनी तुम अनुराग रखना

पुष्पों की खुशबू अपने पास रखना

पेड़ों से कहना , बहाओ चंचल हवाएं

झरनों का संगीत , मन में बसाना

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मैं अनिल कुमार गुप्ता , शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ मुझे कवितायें लिखने ,...
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