नूतन सद्आचार मिल गया

नूतन सद् आचार मिल गया
अपनापन सद्भाव प्रेम सह विज्ञ सुजन व्योहार मिल गया

गाँव-संस्कृति में कुरीतियाँ, धर्मांधता, अशिक्षा -साया
संसार-संस्कृति में विकास सह राष्ट्र-संस्कृति-चेतन माया
नो सेना के अमल अफसरों में जग-संस्कृति-सार मिल गया
नूतन सद् आचार मिल गया

संस्कृतियों के गुणों का मिलन, सद्विकास का उच्चरूप है
अपनी आत्मा का विकास कर,मानुष-तन दिव्यता-भूप है
गुणीं-सु चंदन- *गंध-फुहारों की वर्षा का वार मिल गया
नूतन सद् आचार मिल गया

मिटें भ्रांतियाँ यदि ग्रामों कीं, जीवन तम से नहीं छलेगा
जातिवाद-**धर्मांध-रूढियों की रजनी में दीप जलेगा
विश्व कहेगा भारत को बंधुत्व -सुवोध-उभार मिल गया
नूतन सद् आचार मिल गया
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पं बृजेश कुमार नायक

*गंध =सुगंध
**धर्मांध=धर्म के विषय में बहुत ही अविवेकी तथा कट्टर

यह रचना मैंने दिनांक-07-11-2018 को नोफरा मुम्बई में इंडियन नेवी के अधिकारियों की आवासीय व्यवस्था ,वातावरण एवं मेरे ज्येष्ठ पुत्र के आवास पर आने वाले अधिकारियों के व्यवहार से प्रभावित होकर, दिनांक -07-11-2018 को मुम्बई में लिखी थी |मैने 2018 की दीपावली मुम्बई में बच्चों के साथ मनाई |
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पं बृजेश कुमार नायक

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