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नूतन नववर्ष सनातन ये….

अरविन्द दाँगी

अरविन्द दाँगी "विकल"

कविता

March 30, 2017

नूतन नववर्ष सनातन ये…..आदि अनादिकाल से चलित जो है।
भारतवर्ष जिससे सुशोभित है….राजा विक्रमादित्य से नामित जो है।
माँ शक्ति से जिसका आरंभ है…नवरात्र से शुभारंभ जो है।
ऎसे विक्रम संवत् नववर्ष का…स्वागत वंदन ह्रदय से है।।
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वैदिक विक्रम संवत् 2074 एवं नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये

✍कुछ पंक्तियाँ मेरी कलम से : अरविन्द दाँगी “विकल”

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Author
अरविन्द दाँगी
जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ.... गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ... ✍अरविन्द दाँगी "विकल"

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