बाल कविता · Reading time: 1 minute

*नींद*

*नींद*
°°°°°°
नींद हमें , बहुत ही प्यारी;
नींद में दिखे,दुनिया सारी।

कुछ पढ़ते ही, नींद आती;
कुछ करते ही, नींद आती।

कोई, चाय पी नींद भगाते;
कोई,नींद हेतु गोली खाते।

नींद में दिखे , ऐसा सपना;
पराया भी,दिखता अपना।

नींद होती , ‘रात की रानी’
नींद से करो मत, बेईमानी।

जब मां हमें, लोरी सुनाती;
तुरंत हमें , नींद आ जाती।

********************

….✍️प्रांजल
……कटिहार।

6 Likes · 4 Comments · 92 Views
Like
Author
You may also like:
Loading...