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निस्वार्थ सेवा कर के तो देखो.

अजीत कुमार तलवार

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

कविता

February 4, 2017

जिन्दगी में गर तुमने साथ दे दिया किसी का
और वो भी निस्वार्थ दे दिया तुमने किसी का
तो समझो जीवन में बहुत कुछ पा लिया तुमने
उजड़ा घर संवार कर उसको जीवन दे दिया तुमने !!

तमाशा तो गली मोहल्ले में बन्दर वाला भी दिखा देता है
तुम क्यों अपना तमाशा खुद बनाने में आतुर हो रहे हो
तमाशा बना कर किसी का देखना सब से बड़ा गुनाह है
क्या अगर कोई तुम्हारा बनाये तो कैसा लगता है !!

दूसरों पर हँसना शायद सब से आसान हैं लोगो
खुद पर किसी को कोई हंसाये तो जिन्दगी है दोस्तों
हँसना अच्छा लगता है सबको, तो क्यूं न गम भूल
कर हम आज से ही सब को हंसाएं मेरे दोस्तों !!

झूठ कि बुनियाद मैने बनते कभी नहीं देखी
सच का सामना करने से लोगो को डर लगता है
एक झूठ को छुपाने में जीवन गुजर जाता है
तो क्यों न सच को आज से अपनाये मेरे दोस्तों !!

वादा करके मुकर जाना, कुछ लोगो की फितरत हे
जब निभाया ही नहीं जाता तो क्यों करते हो दोस्तों
तुम्हारे उस वादे का असर उस के जीवन में क्या करता है
इस के लिए किसी से वादा एक बार करके तो देखो दोस्तों !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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Author
अजीत कुमार तलवार
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906

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