मुक्तक · Reading time: 1 minute

“निशाँ जागीर ढूंढेंगे”

मेरे लफ्जों में वो अक्सर, मेरी तस्वीर ढूंढेंगे
खुली आँखों से ख्वाबों में, मेरी तासीर ढूंढेंगे
बडी मुद्दत से पाया था, नादानी में गवाँ बैठे
मेरे जाने पे वो मेरे, निशाँ जागीर ढूंढेंगे ।

कुमार अखिलेश
देहरादून (उत्तराखण्ड)
मोबाइल नंबर 09627547054

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