Aug 12, 2016 · कविता
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निर्गुन

केहू बाटे गोरा केहू बाटे काला
अजब खेल कुदरत के देखा निराला

केहू सॉच पर ऑच आवे न देला
केहू झूठ के संग उमर भर रहेला
केहू भूख के दर्द समझेला लेकिन
केहू हाथ से छीन लेला निवाला
अजब खेल कुदरत के देखा निराला
केहू बाटे गोरा केहू बाटे काला

केहू प्यार पूजा समझ के करेला
केहू प्यार मे जल के तिल तिल मरेला
केहू अपने राधा के मोहन बनेला
केहू बनके मीरा पिये विष के प्याला
अजब खेल कुदरत के देखा निराला
केहू बाटे गोरा केहू बाटे काला

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yaqub azam azam
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