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नियत दिखला देता तो मैं….

Dinesh Sharma

Dinesh Sharma

कविता

August 9, 2016

आइना बोला इंसान से
हे इंसान तू मुझ में
अपना चेहरा देख कर
कितना खुश होता है,
बाल संवारता है,बे धड़क निगाह मिलाता है
तू जैसा चाहता है वैसा दिखलाता हूँ
बस मैं बाहरी सजावट दिखलाता हूँ,
दीवार पर टंगा एक तरफ चुपचाप सा
इसी आस के साथ प्यार से कोई मुझ पर चढ़ी धूल को साफ करेगा अपना चेहरा निहारने के लिए,
शुक्र है मैं चेहरा दिखाता हूँ इंसान का,
नियत दिखाना मेरे वश की बात नही,
नियत दिखला देता तो मैं,
शायद ही कही नजर आता मै।।
बस इज्जत से मुझ को दीवार पर टंगा रहने दो हर इंसान को निहारने दो
मेरे को….

****दिनेश शर्मा****

Author
Dinesh Sharma
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।
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