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नियति का खेल

Akib Javed

Akib Javed

कविता

November 14, 2017

नदी की बहती धारा
नही उसका किनारा।1।

चाँद से रोशन चाँदनी
पूनम रात का सहारा।2।

फूल में बैठे हुए भँवरे
रस ले फूल का सारा।3।

गर करुणामयी हो जीवन
ना करो जीवन से किनारा।4।

सुख दुख,दिन रात सब होते हैं
ये सब नियति का खेल हैं सारा।5।

®आकिब जावेद

Author
Akib Javed
कुछ लिखना चाहता हूँ,सोचता हूँ,शब्दो से खेलता हूँ,सीखता हूँ,लिखता हूँ।।
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