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नित्य नियम

सूरज का नित्य निकलना
चाँद का गगन में दिखना
कुछ कहता , कुछ समझाता है
सृष्टि चक्र चलता निरन्तर
मानव भी देह छोड़ता है
नित्य उदय , अवसान होता है ।

जो इस धरा पर आया है
उसको एक दिन तो जाना है
चाहे निर्धन हो या धनवान
एक ही रास्ता तय होता है
नित्य उदय , अवसान ृ है ।

मन में भावों का उदय होना
पक कर प्रेम में परिवर्तित होना
दिल में दिल का कैद होना
वहीं प्रेम जन्म लेता है
नित्य उदय , अवसान होता है ।

सिकंदर वीर पराक्रमी था
उसका जैसा न कोई नामी था
वो भी आया और चला गया
यही सृष्टि का विधान होता है
नित्य उदय , अवसान होता है ।

वो इमारतें सुन्दर जो दिखती है
प्रेम की अमिट कहानी गढ़ती है
एक दिन खण्डहर बन ढह जायेगी
वक्त का शिकार हर एक होता है
नित्य उदय , अवसान होता है ।

ये जवानी और चेहरे की रंगत
कब छोड़ दे तुम्हारी संगत
झुर्रियों और सिलवटों की सिकुड़न
चाँद भी रूप लावण्य खोता है
नित्य उदय , अवसान होता है ।

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Dr. Madhu Trivedi Shantiniketan College of Business Management and Computer science Agra Principal, Post Graduate College Agra *************** My blog madhu parashar.blogspot.in Meri Dunia coordinator * Rajarshi Tandon Open University…
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