कविता · Reading time: 1 minute

निगाह

जलता है मन
जलती हुई निगाह देखकर
डरती है कली
काले मन का काला नाग
जाने कब डस ले
ये सुनसान राह की काली निगाह से भी
खतरनाक हो गए है
अपनों की छिपी निगाह
बगियाँ की कली अब डरने लगी है,
बाग में बने बिल में
छिपे काले नाग से।।

^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^

59 Views
Like
Author
44 Posts · 6.3k Views
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।
You may also like:
Loading...