निगाह

जलता है मन
जलती हुई निगाह देखकर
डरती है कली
काले मन का काला नाग
जाने कब डस ले
ये सुनसान राह की काली निगाह से भी
खतरनाक हो गए है
अपनों की छिपी निगाह
बगियाँ की कली अब डरने लगी है,
बाग में बने बिल में
छिपे काले नाग से।।

^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^

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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज...
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