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निगाहों में तुम छा गए इस कदर

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गीत

निगाहों में तुम छा गए इस कदर ।
कि अपनी नही कुछ रही अब खबर।।

ये दिल भीड़ में भी अकेला लगे ।
जो खवावो में यादों का मेला लगे।
जहां जाऊँ तुमको ही ढूंढे नज़र।।
निगाहों में तुम———

तेरे गेसुओं में रहूँ एक पल।
जमाने से लेके कहीं दूर चल।
सुकूँ से मिलें हम पहर दो पहर।।
निगाहों में तुम——–

तेरी राह तकता हूँ मैं रात दिन।
नशा कोई चढ़ता नहीं तेरे बिन।
यूँ दिल पे हुआ प्यार का जब असर।।
निगाहों को तुम——–

श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव साईंखेड़ा

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