निगाहें जब निगाहों से तुम्हारी बात करती हैं

निगाहें जब निगाहों से तुम्हारी बात करती हैं
ख़ुशी के मोतियों की तब बहुत बरसात करती हैं

भले खामोश रहकर तुम करो कोशिश छुपाने की
निगाहें पर तुम्हारे सब बयाँ हालात करती हैं

तुम्हारे सामने ये धड़कनें बढ़ती ही जाती क्यूँ
हमें लगता मुहब्बत की ये तहकीकात करती हैं

नज़र अन्दाज़ करते हो हमें जब देखकर भी तुम
वो नज़रें नर्म नाजुक दिल पे तब आघात करती हैं

हमेशा ही निभाती हैं ये आँखें साथ इस दिल का
सुनाने गम ख़ुशी आँसू को वो तैनात करती हैं

लगे अच्छा नहीं कुछ भी सुना हमने जुदाई में
अँधेरे दिल में होते हैं ये रातें बात करती हैं

नहीं आसान जीना है यहाँ पर ‘अर्चना’ देखो
ग़मों की बारिशें हरदम तुषारापात करती हैं

डॉ अर्चना गुप्ता

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