Skip to content

निकल कर कहां से ये आई खबर—- गज़ल

निर्मला कपिला

निर्मला कपिला

गज़ल/गीतिका

July 19, 2016

निकल कर कहां से ये आई खबर
मै ज़िन्दा हूँ किस ने उडाई खबर

हवा मे हैं सरगोशियां चार सू
न दे पर किसी को दिखाई खबर

किसी के यहां जश्न दिन रात हों
मुहल्ले को कब रास आई खबर

रकीबों के पाले मे रहबर गया
नही जा सकी फिर भुलाई खबर

पडी कान मे मुस्कुराती हुयी
मुहब्बत का पैगाम लाई खबर

कभी छू के होठों से बहकी फिरे
कभी हो जो तितली उडाई खबर

पतंगे के पंखों से चिपकी उडे
गुलों के लबों से चुराई खबर

बहुत दिन से बाहर न निकली थी वो
उदर मे पडी तिलमिलाई खबर
Like
Comment

Share this:
Author
निर्मला कपिला
लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी], [प्रेम सेतु], काव्य संग्रह [सुबह से पहले ], शब्द माधुरी मे प्रकाशन, हाईकु संग्रह- चंदनमन मे प्रकाशित हाईकु, प्रेम सन्देश मे 5 कवितायें | प्रसारण... Read more
Recommended for you