कविता · Reading time: 1 minute

नासमझ है…

उसने मुझे एक कागज
थमाया,मुस्कुराते हुए कहा
इसमें लिखा है बहुत कुछ
दिल की आँखों से पड़ सकते हो
तो पढ़ लेना
शब्दों का मर्म समझ लेना
दिल की गहराइयो से,
दिल की बात है दिल से ही समझ लेना
दिमाग इसे समझ नहीं पायेगा,
आँखे इसे पढ़ नहीं पायेगी
हमने झट से कागज लिया और खोला
अचरज भरी निग़ाहों से उसे देखा
और तपाक से उसे बोला
कोरा कागज???
वह जा चुकी थी,
समझ में आया….
दिल की बात दिल ही समझ सकता है
दिल ही पढ़ सकता है….

^^^^दिनेश शर्मा^^^^
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